सूतक और पातक में क्या अंतर है?

अमर उजाला

Sat, 20 September 2025

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हिंदू धर्म में सूतक और पातक, दोनों ही किसी परिवार में होने वाली घटनाओं के बाद लगने वाली अशुद्धि की अवधि हैं। 
 

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अक्सर लोग इन दोनों को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन इनके अर्थ और कारणों में गहरा अंतर है। दोनों ही स्थितियों में परिवार के सदस्य कुछ समय के लिए धार्मिक और मांगलिक कार्यों से दूर रहते हैं।

 

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सूतक

सूतक का संबंध जन्म से है। जब किसी परिवार में बच्चे का जन्म होता है, तो उस परिवार पर कुछ दिनों के लिए सूतक लग जाता है। यह अवधि आमतौर पर दस से तेरह दिनों की होती है। 

 
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इसे जन्म से जुड़ी शारीरिक अशुद्धियों से जोड़ा जाता है। इसका एक व्यावहारिक उद्देश्य मां और बच्चे को बाहरी संक्रमणों से बचाना भी होता है। इस दौरान पूजा-पाठ और मंदिर जाना वर्जित होता है।

 

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पातक 

वहीं, पातक का संबंध मृत्यु से है। जब परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु हो जाती है, तो उस परिवार पर पातक लग जाता है। यह शोक की अवधि होती है, जो आमतौर पर तेरह दिनों (तेरहवीं) तक चलती है। 

 
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इस दौरान परिवार के लोग शोक मनाते हैं और मृतक की आत्मा की शांति के लिए रिचुअल करते हैं। पातक के दौरान भी कोई शुभ या धार्मिक कार्य नहीं किया जाता।

 

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