अमर उजाला
Sat, 20 September 2025
हिंदू धर्म में सूतक और पातक, दोनों ही किसी परिवार में होने वाली घटनाओं के बाद लगने वाली अशुद्धि की अवधि हैं।
अक्सर लोग इन दोनों को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन इनके अर्थ और कारणों में गहरा अंतर है। दोनों ही स्थितियों में परिवार के सदस्य कुछ समय के लिए धार्मिक और मांगलिक कार्यों से दूर रहते हैं।
इसे जन्म से जुड़ी शारीरिक अशुद्धियों से जोड़ा जाता है। इसका एक व्यावहारिक उद्देश्य मां और बच्चे को बाहरी संक्रमणों से बचाना भी होता है। इस दौरान पूजा-पाठ और मंदिर जाना वर्जित होता है।
इस दौरान परिवार के लोग शोक मनाते हैं और मृतक की आत्मा की शांति के लिए रिचुअल करते हैं। पातक के दौरान भी कोई शुभ या धार्मिक कार्य नहीं किया जाता।
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