जिस व्यक्ति का ज्ञान किताबों में सिमट गया

अमर उजाला

Thu, 24 March 2022

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मुझे वह दौलत नहीं चाहिए जिसके लिए कठोर यातना सहनी पड़े, या सदाचार का त्याग करना पड़े या अपने शत्रु की चापलूसी करनी पड़े.

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सभी परोपकार और तप तात्कालिक लाभ देते हैं, लेकिन सुपात्र को जो दान दिया जाता है और सभी जीवों को जो संरक्षण प्रदान किया जाता है उसका पुण्य कभी नष्ट नहीं होता.

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बेइज्जत होकर जीने से अच्छा है कि मर जाएं. मरने में एक क्षण का दुःख होता है पर बेइज्जत होकर जीने में हर रोज दुःख उठाना पड़ता है.

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सभी जीव मीठे वचनों से आनंदित होते हैं. इसीलिए हम सबसे मीठे वचन कहे. मीठे वचन की कोई कमी नहीं है.

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इस दुनिया के वृक्ष को दो मीठे फल लगे हैं. मधुर वचन और सत्संग.

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जिसका ज्ञान किताबों में सिमट गया है और जिसने अपनी दौलत दूसरों के सुपुर्द कर दी है वह जरूरत आने पर ज्ञान या दौलत कुछ भी इस्तेमाल नहीं कर सकता.

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ऐसे स्थिति में मणि भी हो जाता है कबाड़

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