व्यक्ति को महत्ता उसके गुण प्रदान करते हैं, वह जिन पदों पर काम करता है सिर्फ उससे कुछ नहीं होता. क्या आप एक कौवे को गरुड़ कहेंगे यदि वह एक ऊंची ईमारत की छत पर जाकर बैठता है.
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जो व्यक्ति गुणों से रहित है लेकिन जिसकी लोग सराहना करते है वह दुनिया में काबिल माना जा सकता है. लेकिन जो आदमी खुद की ही डींगे हांकता है वो अपने आप को दूसरे की नजरों में गिराता है भले ही वह स्वर्ग का राजा इंद्र हो.
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यदि एक विवेक संपन्न व्यक्ति अच्छे गुणों का परिचय देता है, तो उसके गुणों की आभा को रत्न जैसी मान्यता मिलती है. एक ऐसा रत्न जो प्रज्वलित है और सोने के अलंकर में मढ़ने पर और चमकता है.
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वह व्यक्ति जो सर्व गुण संपन्न है अपने आप को सिद्ध नहीं कर सकता है जबतक उसे समुचित संरक्षण नहीं मिल जाता. उसी प्रकार जैसे एक मणि तब तक नहीं निखरता जब तक उसे आभूषण में सजाया ना जाए.
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क्या कोई बेलगाम आदमी अपने संकटों पर रोक लगा पाया.किस के ऊपर राजा की हरदम मेहरबानी रही. किसके ऊपर समय के प्रकोप नहीं हुए. किस भिखारी को यहां शोहरत मिली. किस आदमी ने दुष्ट के दुर्गुण पाकर सुख को प्राप्त किया.
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मूर्ख को लगता है कि वह हसीन लड़की उसे प्यार करती है. वह उसका गुलाम बन जाता है और उसके इशारों पर नाचता है.
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