वो मधुमक्खी जो कमल की नाजुक पंखुड़ियों में बैठकर उसके मीठे मधु का पान करती थी, वह अब एक सामान्य कुटज के फूल पर अपना ताव मारती है... क्योंकि वो ऐसे देश में आ गई है, जहां कमल है ही नहीं, उसे कुटज के पराग ही अच्छे लगते हैं.
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दुनिया में बंधन के ऐसे अनेक तरीके हैं जिससे व्यक्ति को प्रभाव में लाया जा सकता है और नियंत्रित किया जा सकता है. सबसे मजबूत बंधन प्रेम का है...
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इसका उदाहरण वह मधुमक्खी है जो लकड़ी को छेद सकती है लेकिन फूल की पंखुड़ियों को छेदना पसंद नहीं करती चाहे उसकी जान चली जाए.
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चन्दन कट जाने पर भी अपनी महक नहीं छोड़ते. हाथी बूढ़ा होने पर भी अपनी लीला नहीं छोड़ता. गन्ना निचोड़े जाने पर भी अपनी मिठास नहीं छोड़ता...
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उसी प्रकार ऊंचे कुल में पैदा हुआ व्यक्ति अपने उन्नत गुणों को नहीं छोड़ता, भले ही उसे कितनी भी गरीबी में क्यों ना बसर करना पड़े.
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