अतिथि का सम्मान न करने वाला होता है चांडाल

अमर उजाला

Mon, 21 March 2022

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यदि आदमी को परख नहीं है तो वह अनमोल रत्नों को तो पैर की धूल में पड़ा हुआ रखता है और घास को सिर पर धारण करता है.

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वही सीखें जो अत्यंत महत्वपूर्ण है. उसी प्रकार जैसे हंस पानी छोड़कर उसमे मिला हुआ दूध पी लेता है.

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वह आदमी चांडाल है जो एक दूर से अचानक आए हुए थके मांदे अतिथि को आदर सत्कार दिए बिना रात्रि का भोजन खुद खाता है.

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एक व्यक्ति को चारों वेद और सभी धर्मशास्त्रों का ज्ञान है. लेकिन उसे यदि अपनी आत्मा की अनुभूति नहीं हुई तो वह उसी चमचे के समान है जिसने अनेक पकवानों को हिलाया लेकिन किसी का स्वाद नहीं चखा.

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वह लोग धन्य हैं, ऊंचे उठे हुए हैं जिन्होंने संसार समुद्र को पार करते हुए एक सच्चे ब्राह्मण की शरण ली

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