ऐसे काम से ब्राह्मण बन जाता है वैश्य

अमर उजाला

Thu, 3 March 2022

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इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि व्यक्ति उन बातों के प्रति अनुदगार रहता है जिसका उसे कोई ज्ञान नहीं. उसी प्रकार जैसे एक जंगली शिकारी की पत्नी हाथी के सिर का मणि फेंककर गूंजे की माला धारण करती है.

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जो व्यक्ति एक साल तक भोजन करते समय भगवान का ध्यान करेगा और मुंह से कुछ नहीं बोलेगा, उसे एक हजार करोड़ वर्ष तक स्वर्ग लोक की प्राप्ति होगी.

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एक विद्यार्थी पूर्ण रूप से निम्न लिखित बातों का त्याग करे.

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काम, क्रोध, लोभ, स्वादिष्ट भोजन की अपेक्षा, शरीर का शृंगार, अत्याधिक जिज्ञासा, अधिक निद्रा, शरीर निर्वाह के लिए अत्याधिक प्रयास.

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वही सही में ब्राह्मण है जो केवल एक बार के भोजन से संतुष्ट रहे, जिस पर सोलह संस्कार किए गए हों, जो अपनी पत्नी के साथ महीने में केवल एक दिन समागम करे. माहवारी समाप्त होने के दूसरे दिन.

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वह ब्राह्मण जो दुकानदारी में लगा है, असल में वैश्य ही है.

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निम्न स्तर के लोगों से जिस व्यवसाय में संपर्क आता है, वह व्यवसाय ब्राह्मण को शुद्र बना देता है.

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