अमर उजाला
Fri, 13 September 2024
जनेऊ का अर्थ सनातन संस्कृति से पहचाना जा सकता है जहां जन्म से लेकर मरण तक कुल 16 संस्कारों के बारे में बताया गया है
जिसमें गर्भादान संस्कार से लेकर अंतिम संस्कार तक की बात कही गई है इसी के बीच ‘उपनयन संस्कार’ भी होता है जिसे ‘जनेऊ’, ‘ब्रह्मसूत्र’ के नाम से भी जाना जाता है
जनेऊ का अर्थ है- आपको परम सत्य की तरफ ले जाना, यानी कि आप जिसके लिए बने है उस तक पहुंचाना
कई विद्वानों का कहना है कि जनेऊ सिर्फ ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य ही पहन सकते है लेकिन ऐसा नहीं है
असल में जनेऊ धारण करने के बहुत ही कठिन नियम होते हैं इसके लिए अध्यात्म के विषय में बहुत आगे बढ़ना होता है
साथ ही आपको उपनिषदों, वेदों और अपने शास्त्रों को गहराई से समझना होगा कहा जाता है कि माता के जन्म के बाद यज्ञोपवीत संस्कार को पुनर्जन्म कहा जाता है
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