अमर उजाला
Sat, 9 November 2024
पौराणिक कथा के अनुसार वृंदा के पतिव्रत धर्म को तोड़ने के लिए नारायण ने जालंधर का रूप धारण कर वृंदा को स्पर्श किया था
जिसके बाद जालंधर की सारी शक्तियां क्षीण हो गई और शिव जी ने उस असुर का वध कर दिया
ऐसे में वृंदा श्री हरि को श्राप दे दिया कि वे तुरंत पत्थर के बन जाएं, बाद में वृंदा ने नारायण को श्राप से मुक्त कर दिया
लेकिन उसने स्वयं आत्मदाह कर लिया, जिस स्थान पर वृंदा भस्म हुई वहां तुरंत एक पौधा उग गया
विष्णु भगवान ने उसे तुलसी का नाम दिया और बोले कि शालिग्राम नाम से मेरा एक रूप इस पत्थर में हमेशा विराजमान रहेगा
जिसकी पूजा सदैव के लिए तुलसी के साथ ही की जाएगी इसी कारण से हर साल देवउठनी एकादशी पर शालिग्राम जी और देवी तुलसी का विवाह कराया जाता है
कार्तिक पूर्णिमा पर ही क्यों मनाई जाती हैं देव दीपावली?