अमर उजाला
Sun, 8 October 2023
श्राद्ध का अर्थ अपने देवों,परिवार, वंश परंपरा, संस्कृति और इष्ट के प्रति श्रद्धा रखना है
शास्त्रों में कहा गया है कि जो स्वजन अपना शरीर छोड़कर चले गए हैं,उनकी तृप्ति और उन्नति के लिए जो शुभ संकल्प और तर्पण किया जाता है,वह श्राद्ध है
मान्यता है कि पितृपक्ष में हम जो भी पितरों के नाम का निकालते हैं, उसे वे सूक्ष्म रूप में आकर ग्रहण करते हैं
श्राद्ध का अनुष्ठान करते समय दिवंगत प्राणी का नाम और उसके गोत्र का उच्चारण किया जाता है
हाथों में कुश की पैंती डालकर काले तिल से मिले हुए जल से पितरों को तर्पण किया जाता है
मृत्यु के देवता यमराज श्राद्ध पक्ष में जीव को मुक्त कर देते हैं, ताकि वे स्वजनों के यहां जाकर तर्पण ग्रहण कर सकें
श्रद्धा से कराया गया भोजन और पवित्रता से जल का तर्पण ही श्राद्ध का आधार है
यात्रा में जा रहे व्यक्ति, रोगी या निर्धन व्यक्ति को कच्चे अन्न से श्राद्ध करने की छूट दी गई है
गया में ही क्यों किया जाता है पिंडदान?