शनि देव और हनुमान जी की कहानी

अमर उजाला

Tue, 21 February 2023

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एक बार हनुमान जी श्री राम की भक्ति में व्यस्त थे, उस जगह से शनिदेव जी गुजर रहे थे, रास्ते में उन्हें हनुमानजी दिखाई पड़े

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हनुमान जी को देख शनिदेव जी को शरारत सूझी और वे हनुमान जी को परेशान करने लगे, हनुमानजी ने शनि देव को ऐसा करने से रोका पर वे नहीं माने

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हनुमानजी ने तब शनिदेव जी को अपनी पूंछ से जकड लिया और फिर से राम कार्य में लगे, कार्य के दौरान वे इधरउधर चहलकदमी भी कर रहे थे इस वजह से शनिदेव को बहुत सारी चोटें आईं

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शनिदेव ने बहुत प्रयास किया पर हनुमान जी की कैद से खुद को छुड़ा नहीं पाए, उन्होंने विनती की पर हनुमानजी अपने कार्य में खोये हुए थे, बाद में उन्हें शनिदेव का ख्याल आया और तब उन्होंने शनिदेव को आजाद किया
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शनिदेव जी को अपनी भूल का अहसास हुआ और उन्होंने हनुमान से माफी मांगी कि वे कभी भी राम और हनुमान जी के कार्यों में कोई विघ्न नहीं डालेंगे और श्री राम और हनुमान जी के भक्तों को उनका विशेष आशीष प्राप्त होगा 

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फिर हनुमानजी ने शनि सरसों का तेल उपलब्ध करवाया और इस तरह शनिदेव के जख्म ठीक हुए, तब शनिदेव ने कहा की इस स्मृति में जो भी भक्त शनिवार के दिन मुझपर सरसों का तेल चढ़ाएगा उसे मेरा विशेष आशीष प्राप्त होगा
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