जानिए शिव के स्वरूप की 10 खास बातें

अमर उजाला

Mon, 3 July 2023

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जटाएं

शिव की जटाएं अंतरिक्ष का प्रतीक हैं
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चंद्र

चंद्रमा मन का प्रतीक है, शिव का मन चांद की तरह निर्मल और उज्ज्वल है
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त्रिनेत्र 

शिव की तीन आंखें हैं, शिव की ये आंखें सत्व, रज, तम (तीन गुणों), भूत, वर्तमान, भविष्य (तीन कालों), स्वर्ग, मृत्यु पाताल (तीनों लोकों) का प्रतीक हैं
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सर्पहार

सर्प तमोगुणी व संहारक जीव है, जिसे शिव ने अपने वश में कर रखा है
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त्रिशूल

त्रिशूल भौतिक, दैविक, आध्यात्मिक इन तीनों तापों को नष्ट करता है
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डमरू

शिव के एक हाथ में डमरू है, जिसे वह तांडव नृत्य करते समय बजाते हैं, डमरू का नाद ही ब्रह्मा रूप है
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मुंडमाला 

शिव के गले में मुंडमाला है, जो इस बात का प्रतीक है कि शिव ने मृत्यु को वश में किया हुआ है
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छाल 

बाघ हिंसा और अहंकार का प्रतीक है, शिव के शरीर पर बाघ की खाल पहनने का अर्थ है कि उन्होंने अहंकार का दमन कर अपने नीचे दबा लिया है
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भस्म 

शिव के शरीर पर भस्म लगी होती है, शिवलिंग का अभिषेक भी भस्म से किया जाता है, भस्म का लेप बताता है कि यह संसार नश्वर है
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वृषभ

महादेव चार पैर वाले वृषभ की सवारी करते हैं, जो बताता है कि धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष उनकी कृपा से ही मिलते हैं
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