जानिए शिव के स्वरूप की 10 खास बातें शिव की जटाएं अंतरिक्ष का प्रतीक हैं चंद्रमा मन का प्रतीक है, शिव का मन चांद की तरह निर्मल और उज्ज्वल है शिव की तीन आंखें हैं, शिव की ये आंखें सत्व, रज, तम (तीन गुणों), भूत, वर्तमान, भविष्य (तीन कालों), स्वर्ग, मृत्यु पाताल (तीनों लोकों) का प्रतीक हैं सर्प तमोगुणी व संहारक जीव है, जिसे शिव ने अपने वश में कर रखा है त्रिशूल भौतिक, दैविक, आध्यात्मिक इन तीनों तापों को नष्ट करता है शिव के एक हाथ में डमरू है, जिसे वह तांडव नृत्य करते समय बजाते हैं, डमरू का नाद ही ब्रह्मा रूप है शिव के गले में मुंडमाला है, जो इस बात का प्रतीक है कि शिव ने मृत्यु को वश में किया हुआ है बाघ हिंसा और अहंकार का प्रतीक है, शिव के शरीर पर बाघ की खाल पहनने का अर्थ है कि उन्होंने अहंकार का दमन कर अपने नीचे दबा लिया है शिव के शरीर पर भस्म लगी होती है, शिवलिंग का अभिषेक भी भस्म से किया जाता है, भस्म का लेप बताता है कि यह संसार नश्वर है महादेव चार पैर वाले वृषभ की सवारी करते हैं, जो बताता है कि धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष उनकी कृपा से ही मिलते हैं शिव