हर संकट से उबारती हैं रामचरितमानस की ये चौपाइयां

अमर उजाला

Thu, 9 June 2022

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रोग विनाश के लिए

राम कृपा नाशहिं सव रोगा। 
जो यहि भाँति बनहि संयोगा।।
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संकट से बचने के लिए

दीन दयालु विरद संभारी।
हरहु नाथ मम संकट भारी।।
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आत्मरक्षा के लिए

मामभिरक्षक रघुकुल नायक।
घृत वर चाप रुचिर कर सायक।।
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विपत्ति दूर करने के लिए

राजीव नयन धरे धनु सायक।
भक्त विपत्ति भंजन सुखदायक।।
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इच्छापूर्ति के लिए

कवन सो काज कठिन जग माही!
जो नहीं होइ तात तुम पाहीं!!
 
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शत्रु नाश के लिए

बयरू न कर काहू सन कोई।
रामप्रताप विषमता खोई।।
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मूर्खों के साथ मित्रता नहीं रखनी चाहिए

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