हर संकट से उबारती हैं रामचरितमानस की ये चौपाइयां राम कृपा नाशहिं सव रोगा। जो यहि भाँति बनहि संयोगा।। दीन दयालु विरद संभारी। हरहु नाथ मम संकट भारी।। मामभिरक्षक रघुकुल नायक। घृत वर चाप रुचिर कर सायक।। राजीव नयन धरे धनु सायक। भक्त विपत्ति भंजन सुखदायक।। कवन सो काज कठिन जग माही! जो नहीं होइ तात तुम पाहीं!! बयरू न कर काहू सन कोई। रामप्रताप विषमता खोई।। रामचरितमानस की चौपाइयां