जब शबरी के जूठे बेर खाकर श्रीराम ने दिया खास संदेश, जानें अनूठी कथा

अमर उजाला

Thu, 9 February 2023

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शबरी भील समुदाय से थीं और उनका विवाह भील समुदाय के राजकुमार से तय हुआ था जहां पर पशुबलि की परंपरा थी, लेकिन शबरी को किसी भी प्रकार की हिंसा पसंद नहीं थी इसलिए विवाह से ठीक एक दिन पूर्व घर छोड़कर मातंग ऋषि के आश्रम में रहने लगीं
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जब ऋषि मातंग का अंतिम समय निकट आया तो उन्होंने शबरी को बुलाकर कहा कि वो अपने आश्रम में ही प्रभु राम की प्रतीक्षा करें, वे उनसे जरूर मिलने आएंगे, इसके बाद ऋषि ने देह का त्याग दिया

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शबरी ऋषि की बात को मानकर भगवान राम का इंतजार करने लगीं, रोज की तरह ही वह रास्ते को साफ करतीं, भगवान के लिए मीठे बेर तोड़कर लातीं मीठे बेर के लिए वह प्रत्येक बेर को चखकर एक पात्र में रखती थीं
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एक दिन भगवान राम से मुलाकात का समय आ गया, वृद्ध शबरी भगवान राम के आने की खबर से प्रसन्न हो उठीं और भगवान राम के चरणों को धोकर और बैठने का स्थान दिया, इसके बाद जूठे बेर भगवान को खाने के लिए दिए

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श्रीराम ने शबरी के जूठे बेर प्रेम से खाए और खाने के बाद उन्होंने शबरी को भामिनी कहा जिसका अर्थ होता है अत्यन्त आदरणीय नारी, बेर खाने के बाद प्रभु राम ने शबरी से कहा कि आदरणीय नारी मैं केवल प्रेम के रिश्ते को मानता हूं
 
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श्रीराम ने कहा कि तुम कौन हो, तुम किस परिवार में पैदा हुई, तुम्हारी जाति क्या है ये सब कोई मायने नहीं रखते तुम्हारा मेरे प्रति प्रेम ही मुझे तुम्हारे घर तक लेकर आया

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