अमर उजाला
Thu, 9 February 2023
जब ऋषि मातंग का अंतिम समय निकट आया तो उन्होंने शबरी को बुलाकर कहा कि वो अपने आश्रम में ही प्रभु राम की प्रतीक्षा करें, वे उनसे जरूर मिलने आएंगे, इसके बाद ऋषि ने देह का त्याग दिया
एक दिन भगवान राम से मुलाकात का समय आ गया, वृद्ध शबरी भगवान राम के आने की खबर से प्रसन्न हो उठीं और भगवान राम के चरणों को धोकर और बैठने का स्थान दिया, इसके बाद जूठे बेर भगवान को खाने के लिए दिए
श्रीराम ने कहा कि तुम कौन हो, तुम किस परिवार में पैदा हुई, तुम्हारी जाति क्या है ये सब कोई मायने नहीं रखते तुम्हारा मेरे प्रति प्रेम ही मुझे तुम्हारे घर तक लेकर आया
हनुमान जी को क्यों चढ़ाया जाता है सिंदूर