अमर उजाला
Thu, 9 March 2023
शास्त्रों में वर्णित है कि त्रेता युग में धरती पर असुरों का उत्पात बढ़ गया था
तभी से हर साल चैत्र माह की शुक्ल पक्ष के नवमी तिथि को रामनवमी का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है
भगवान श्रीराम ने धर्म की स्थापना के लिए पूरे जीवन अपार कष्टों को सहा और एक आदर्श नायक के रूप में स्वयं को स्थापित किया
कठिन से कठिन परिस्थितियों में श्रीराम ने धर्म का त्याग नहीं किया और न ही अनीति का वरण किया
इस सब गुणों के चलते उन्हें उत्तम पुरुष की संज्ञा मिली और मर्यादा पुरुषोत्तम कहा गया
हनुमान जी को बेहद प्रिय हैं ये भोग