अमर उजाला
Fri, 13 September 2024
पुराणों में भी पितृ पक्ष का उल्लेख देखने को मिलता है माना जाता है कि इसकी शुरुआत रामायण-महाभारत के काल में हुई थी
रामायण में भगवान राम अपने पिता दशरथ का तर्पण करते समय अंगूठे से जल अर्पित करते हैं
वहीं महाभारत के दौरान भी पांडवों ने अपने परिजनों का तर्पण अंगूठे से जल देकर किया था
अंगूठे से तर्पण का जल देने का कारण शास्त्रों में यह बताया गया है कि मनुष्य के हाथ के अंगूठे में पितरों का वास माना होता है
यही कारण है कि अंगूठे को पितृ तीर्थ कहा गया है माना जाता है कि तर्पण में अंगूठे से जल देने पर यह सीधे पिंडों तक पहुंचता है
जब पिंडों पर जल गिरता है तभी पितरों को भोजन मिलता है
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