अमर उजाला
Mon, 23 September 2024
हिंदू धर्म में किसी भी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके परिजनों द्वारा पिंडदान और श्राद्ध की परंपरा है
लेकिन आपने सुना होगा कि कई लोग मरने से पहले अपने आप ही खुद का श्राद्ध कर लेते हैं
खुद का श्राद्ध और पिंडदान करना दुर्लभ और असामान्य परिस्थिति मानी जाती है
ऐसी स्थिति तब बन सकती है जब व्यक्ति को अपनी मृत्यु का पूर्वाभास हो और उसके आगे कुल में कोई अंतिम संस्कार करने वाला न हो
इस स्थिति में व्यक्ति मरने से पहले ही अपना श्राद्ध और पिंडदान करके पितृ ऋण से मुक्त हो सकता है
यह आत्मा की शांति और मोक्ष प्राप्ति के उद्देश्य से किया जाता है
सपने में मृत माता-पिता को देखना है किस बात का संकेत?