गया में ही क्यों किया जाता है पिंडदान?

अमर उजाला

Fri, 6 October 2023

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पिंडदान के लिए गया को सर्वोपरी मानने के पीछे कई कारण हैं, एक मान्यता है कि गया में पिंडदान करने से 108 कुल और 7 पीढ़ियों का उद्धार होता है
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साथ ही पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है, इसलिए ज्यादातर लोग गया में ही पितरों का श्राद्ध और पिंडदान करते हैं
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वहीं गरुड़ पुराण के आधारकाण्ड के अनुसार भगवान राम और माता सीता ने राजा दशरथ का पिंडदान गया में ही किया था

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कथा के अनुसार एक बार माता सीता को फल्गु नदी के किनारे अकेला छोड़कर राम और लक्ष्मण पिंडदान की सामग्री इकट्ठा करने गए थे, तभी राजा दशरथ वहां प्रकट हुए और उन्होंने पिंडदान की मांग की
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इसके बाद माता सीता ने तुरंत नदी के किनारे मौजूद बालू से पिंड बनाया और फल्गु नदी के साथ वटवृक्ष, केतकी के फूल और गाय को साक्षी मानते हुए पिंडदान किया
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माता सीता के बनाए बालू के पिंडदान से राजा दशरथ को मोक्ष की प्राप्ति हुई, तभी से मान्यता है कि गया में पिंडदान करने से मृतक की आत्मा को स्वर्ग की प्राप्ति होती है

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