भगवान शिव के जन्म से जुड़ी कई कथाएं प्रचलित हैं। एक कथा के मुताबिक एक बार भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु के बीच खुद को सर्वश्रेष्ठ बताने को लेकर जमकर बहस हुई।
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वो बहस कर ही रहे थे कि तभी उन्हें एक रहस्यमयी खंभा दिखाई दिया, जिसका कोई ओर व छोर नज़र नहीं आ रहा था।
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तभी एक आकाशवाणी हुई और दोनों को खंभे को पहला व आखिरी छोर ढूंढने की चुनौती दी गई।
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तब ब्रह्मा ने एक पक्षी का रूप धारण किया तो भगवान विष्णु ने वराह का और दोनों खंभों का पहला और आखिरी छोर ढूंढने के लिए निकल पड़े।
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कड़े प्रयास के बाद भी दोनों असफल रहे और हार मानकर जब लौटे तो वहां भगवान शिव को पाया।
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तब उन्हें अहसास हुआ कि ब्रह्माण्ड का संचालन एक सर्वोच्च शक्ति द्वारा हो रहा है, जो भगवान शिव ही हैं।
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इस कथा में खंभा भगवान शिव के कभी न खत्म होने वाले स्वरूप को दिखाता है। यानी शिव अनंत हैं।