अमर उजाला
Wed, 15 February 2023
पौराणिक कथा के अनुसार, शिलाद ऋषि शिवजी के परम भक्त थे, वंश वृद्धि की इच्छा से उन्होंने शिव जी से एक सुयोग्य और सुंदर पुत्र की कामना की
संतों के इस आचरण शिलाद ऋषि चिंता में पड़ गए और उनसे इसका कारण पूछा, तो उन्होंने बताया कि नंदी अल्पायु है, ये सुनकर शिलाद ऋषि दुखी हो गए उन्होंने बेटे नंदी को बताया तो उन्होंने हंसते हुए कहा कि शिव जी ने आपको पुत्र दिया था वही रक्षा भी करेंगे
उसके बाद नंदी भुवन नदी के किनारे भगवान शिव की तपस्या में लीन हो गए, उनकी कठोर तप से भगवान शिव प्रसन्न हुए और वरदान मांगने को कहा तब नंदी ने कहा कि हे प्रभु! आप मुझे अपना सानिध्य प्रदान करें
ये जीवन आपके सानिध्य में ही व्यतीत करना चाहता हूं, उनकी भक्ति को देखकर शिव जी ने नंदी को गले लगा लिया और उनको बैल का चेहरा दे दिया, नंदी गणों में शिव के सबसे प्रिय हैं और परम भक्त भी, तब से नंदी भगवान शिव के वाहन बन गए
शिवलिंग पर भूल से भी अर्पित न करें ये चीजें