अमर उजाला
Wed, 8 February 2023
एक दिन दुर्योधन जलक्रीड़ा के बहाने पांडवों को गंगा तट पर ले गया वहां उसने भीम को मार डालने के उद्देश्य से उनके भोजन में कालकूट विष मिला कर खिला दिया
विष के प्रभाव से अचेत हो जाने पर दुर्योधन ने उन्हें लताओं से बांधकर गंगा जी में डाल दिया, जल में डूब कर बेहोशी की दशा में ही भीमसेन नागलोक पहुंच गए
वहां नागों के डंसने से काल कूट का प्रभाव समाप्त हो गया और भीमसेन होश में आ गए और उन्होंने सर्पों को मारना शुरू कर दिया
इस पर जब सर्पों ने उनकी शिकायत नागराज वासुकि से की, तब नागराज वासुकि के साथ आर्यक भी भीम को देखने के लिए आए, आर्यक कुंती के पिता शूरसेन के नाना थे ऐसे में भीमसेन को पहचान कर उन्हें विशेष प्रसन्नता हुई
भीमसेन को उन्होंने वहां के कुंडों का अमृत रस पिला कर दस हजार हाथियों का बल प्रदान कर दिया
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