पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण पार्वती माता को शैलपुत्री भी कहा जाता है
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ब्रह्मचारिणी
भगवान शिव को पाने के लिए माता पार्वती ने वर्षों तक कठोर तप किया था, इसलिए माता को ब्रह्मचारिणी के नाम से जाना गया
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चंद्रघंटा
देवी के मस्तक पर अर्ध चंद्र के आकार का तिलक विराजमान है इसीलिए इनको चंद्रघंटा के नाम से भी जाना जाता है
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कूष्मांडा
देवी में ब्रह्मांड को उत्पन्न करने की शक्ति व्याप्त है और वे उदर से अंड तक अपने भीतर ब्रह्मांड को समेटे हुए हैं, इसलिए मातारानी को कूष्मांडा नाम से जाना जाता है
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स्कंदमाता
माता पार्वती कार्तिकेय की मां हैं और कार्तिकेय का एक नाम स्कंद भी है इसलिए ये स्कंद की माता यानी स्कंदमाता कहलाती हैं
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कात्यायिनी
महिषासुर का विनाश करने के लिए ब्रह्मा, विष्णु, महेश ने अपने तेज का अंश देकर एक देवी को उत्पन्न किया, इस देवी की सर्वप्रथम पूजा महर्षि कात्यायन ने की थी इसलिए इन्हें कात्यायनी के नाम से जाना गया
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कालरात्रि
मां भगवती के सातवें रूप को कालरात्रि कहते हैं, काल यानी संकट, जिसमें हर तरह का संकट खत्म कर देने की शक्ति हो, वो माता कालरात्रि हैं
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महागौरी
कठोर तप के कारण जब माता का वर्ण काला पड़ गया तब शिव ने इनके शरीर को गंगा के पवित्र जल से धोया, फिर इनका शरीर विद्युत प्रभा के समान अत्यंत कांतिमान-गौर हो उठा, तभी से इनका नाम महागौरी पड़ा
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सिद्धिदात्री
अपने भक्तों को सर्व सिद्धियां प्रदान करने वाली देवी होने के कारण इन्हें सिद्धिदात्री कहा जाता है
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