रूद्राक्ष के मोती दुनिया के निर्माण में इस्तेमाल हुए तत्वों का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसका तात्पर्य है कि भगवान शिव अपने ब्रह्मांडीय कानूनों के बारे में दृढ रहते हैं
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गले में सर्प
भगवान शिव के गले में सर्प का तीन बार लिपटे रहना भूत, भविष्य और वर्तमान का सूचक है, सर्प को कुंडलिनी शक्ति भी कहा गया है
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शिव का तीसरा नेत्र
शिव का तीसरा नेत्र सांसारिक वस्तुओं से परे संसार को देखने का बोध कराता है
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भगवान शिव का त्रिशूल
शिव का त्रिशूल मानव शरीर में मौजूद तीन मूलभूत नाड़ियों बायीं, दाहिनी और मध्य का सूचक है
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भोलेनाथ का डमरू
भोलेनाथ का डमरू नाद का प्रतीक है, नाद सृजन का प्रतीक है