अमर उजाला
Wed, 4 October 2023
जीवित्पुत्रिका व्रत के पारण में महिलाएं जितिया का लाल रंग का धागा गले में पहनती हैं, साथ ही व्रती महिलाएं जितिया का लॉकेट भी धारण करती हैं
जीवित्पुत्रिका व्रत की पूजा के दौरान सरसों का तेल और खल चढ़ाया जाता है और व्रत पारण के बाद यह तेल बच्चों के सिर पर आशीर्वाद के तौर पर लगाते हैं
जितिया व्रत को रखने से पहले कुछ जगहों पर महिलाएं गेहूं के आटे की रोटियां खाने की बजाए मरुआ के आटे की रोटियां खाती हैं
इस व्रत से पहले नोनी का साग खाने की भी परंपरा है, कहा जाता है कि नोनी के साग में कैल्शियम और आयरन भरपूर मात्रा में होता है जिसके कारण व्रती के शरीर को पोषक तत्वों की कमी नहीं होती है
सनातन धर्म में पूजा-पाठ में मांसाहार का सेवन वर्जित माना गया है, लेकिन इस व्रत की शुरुआत बिहार में कई जगहों पर मछली खाकर की जाती है
कहते हैं कि इस परंपरा के पीछे जीवित्पुत्रिका व्रत की कथा में वर्णित चील और सियार का होना है
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