जगन्नाथ मंदिर में मिलने वाले प्रसाद को क्यों कहा जाता है महाप्रसाद कहा जाता है कि एक बार महाप्रभु वल्लभाचार्य एकादशी व्रत के दिन जगन्नाथ मंदिर पहुंचे तब भगवान जी ने उनकी निष्ठा की परीक्षा लेने का सोचा, व्रत के दिन वहां वल्लभाचार्य को किसी ने प्रसाद दिया लेकिन वल्लभाचार्य ने स्तवन करते हुए दिन के बाद रात भी बिता दी, अगले दिन द्वादशी को स्तवन समाप्त होने पर उन्होंने प्रसाद को ग्रहण किया जिसके बाद 'प्रसाद' को 'महाप्रसाद' का गौरव प्राप्त हुआ जगन्नाथ मंदिर में भोग बनाने के लिए करीब 500 रसोइया और उनके 300 सहयोगी काम करते हैं यहां रोजाना 56 तरह के भोग तैयार किये जाते हैं, ये सारे व्यंजन मिट्टी के बर्तनों में तैयार किये जाते हैं महाप्रसाद