इस तरह हुई अयोध्या में होली की शुरुआत

अमर उजाला

Mon, 27 February 2023

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कहा जाता है कि भगवान श्रीराम के वंशज महाराजा रघु ने अपने शासनकाल में एक राक्षसी के उपद्रव से दुखी होकर उसके संहार के लिए होलिका की परंपरा की शुरुआत की थी
 

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त्रेता काल में महाराजा रघु के समय में एक ढूंढा नाम की राक्षसी थी, उसके उपद्रव और अत्याचार इतने बढ़ गए थे कि सभी लोग त्रस्त हो गए थे

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तब महाराजा रघु ने गुरु वशिष्ट से राक्षसी से मुक्ति के निवारण के बारे में पूछा, गुरु वशिष्ठ ने महाराजा रघु से कहा कि चौक-चौराहे पर यदि दहन किया जाए तो उसका उपद्रव स्वत: ही शांत हो जाएगा
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गुरु के कहेनुसार महाराजा रघु ने पूरे नगर में यह सूचना दिलवा दी,इसके बाद सभी चौराहों पर लकड़ियां एकत्र कर युवाओं ने दहन किया और उस राक्षसी का उपद्रव समाप्त हो गया

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तब से होलिका दहन की परंपरा की शुरुआत मानी जाती है

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डिस्क्लेमर- ये खबर लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस खबर में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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