होली से जुड़ी पौराणिक कथा

अमर उजाला

Mon, 6 March 2023

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पौराणिक कथा के अनुसार, देवी पार्वती शिव जी से विवाह करना चाहती थीं, लेकिन तपस्या में लीन शिव ने उनकी ओर ध्यान नहीं दिया

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पार्वती की कोशिश को देखकर कामदेव प्रसन्न हुए और शिव जी की तपस्या भंग करने के लिए उन्होंने शिव पर पुष्प बाण चला दिया, जिसके कारण शिव की तपस्या भंग हो गई

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तपस्या भंग होने की वजह से शिव नाराज हो गए और उन्होंने अपनी तीसरी आंख खोल दी और उनके क्रोध की अग्नि में कामदेव भस्म हो गए

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कामदेव के भस्म होने के बाद उनकी पत्नी रति को असमय ही वैधव्य सहना पड़ा, फिर रति ने शिव की आराधना की

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इसके बाद शिव जी कामदेव को जीवित कर दिया, उसे नया नाम दिया मनसिज, कहा कि अब तुम अशरीरी रहोगे
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उस दिन फागुन की पूर्णिमा थी, उसके बाद आधी रात को लोगों ने होलिका दहन किया, सुबह तक उसकी आग में वासना की मलिनता जलकर प्रेम के रूप में प्रकट हो गई

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कामदेव अशरीरी भाव से नए सृजन के लिए प्रेरणा जगाते हुए विजय का उत्सव मनाने लगे, यह दिन होली का दिन होता है

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असुर होने के बावजूद भी क्यों पूजी जाती हैं होलिका

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