पहली बार जैसा व्रत का संकल्प लिया जाता है आजीवन उसे वैसे ही निभाना पड़ता है, ध्यान रहे निर्जला या फलाहार व्रत का संकल्प लें तो उसे पूरा जरूर करें
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व्रत की अवधि का ध्यान रखें
हरतालिका तीज व्रत 24 घंटे के लिए रखा जाता है, इस व्रत की शुरुआत भाद्रपद शुक्ल तृतीया तिथि के सूर्योदय से होती है और अगले दिन चतुर्थी के सूर्योदय पर ये समाप्त होता है
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न करें अन्न, जल का सेवन
हरतालिका तीज का व्रत निर्जला होता है, ऐसे में इस व्रत में अन्न, जल का सेवन नहीं करना चाहिए, हालांकि अगर आप निर्जला व्रत करने में सक्षम न हो तो फलाहार व्रत कर सकती हैं
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ऐसे समय में न करें पूजा
अगर हरतालिका तीज के दौरान महिलाओं को मासिक धर्म हो जाए तो उन महिलाओं को दूर से ही भगवान की कथा सुननी चाहिए, भगवान को नहीं छूना चाहिए
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बीच में न छोड़ें व्रत
एक बार हरतालिका तीज का व्रत शुरू कर दिया तो इसे बीच में छोड़ा नहीं जा सकता, व्रती के जीवनकाल तक इसका पालन करना पड़ता है
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रात्रि जागरण क्यों है जरूरी
शास्त्रों के अनुसार हरतालिका तीज व्रत में व्रतधारी महिलाओं का दोपहर या रात्रि सोना वर्जित है, इस व्रत में रात्रि के चारों प्रहर में शिव-पार्वती की पूजा करने से व्रत का वधान
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सोलह श्रृंगार
इस दिन सुहागिनों को 16 श्रृंगार कर शिव-पार्वती की पूजा करनी चाहिए, मेहंदी जरुर लगाएं, मान्यता है इससे शिव-गौरी जल्द प्रसन्न होकर समस्त मनोकामना पूरी करते हैं
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कथा
हरतालिका तीज व्रत में कथा का श्रवण जरूर करें, चारों प्रहर में आखिरी पूजा के बाद माता पार्वती को चढ़ाया सिंदूर अपने माथे पर लगाएं और सुहाग की सामग्री ब्राह्मणी को दान कर दें
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व्रत का पारण
हरतालिक तीज व्रत का पारण करने से पहले स्नान कर विधि वत शिव-पार्वती की पूजा करें, फिर प्रसाद खाकर ही व्रत खोलें
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न करें ऐसा काम
इस दिन व्रती को काले या सफेद रंग के वस्त्र नहीं पहनना चाहिए साथ ही क्रोध, लालच और अहंकार से बचें