अमर उजाला
Tue, 21 February 2023
नासै रोग हरे सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥
संकट तै हनुमान छुडावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥
अंतकाल रघुवरपुर जाई। जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा॥
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता॥
भीम रूप धरि असुर सँहारे। रामचंद्र के काज संवारे॥
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शनि देव और हनुमान जी की कहानी