अमर उजाला
Tue, 17 June 2025
हर महीने आने वाली अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित होती है और हिंदू धर्म में पितरों को देव तुल्य माना जाता है।
पितरों की प्रसन्नता से परिवार में सुख-समृद्धि आती है, जबकि पितृ दोष से घर में क्लेश और परेशानियां बढ़ती हैं।
कुंडली में पितृ दोष होने पर समस्याएं गंभीर हो जाती हैं, इसलिए आषाढ़ अमावस्या पर पितरों की शांति के लिए उपाय जरूरी हैं।
आषाढ़ अमावस्या को दर्श अमावस्या भी कहा जाता है, जो पितृ दोष मुक्ति के लिए बहुत शुभ है।
आषाढ़ अमावस्या 25 जून 2025 को मनाई जाएगी, जो शाम 7 बजे से शुरू होकर अगले दिन शाम 4:02 मिनट तक चलेगी।
इस दिन पवित्र नदी में स्नान करना शुभ माना जाता है; यदि नदी में स्नान संभव न हो तो घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
तर्पण और पितरों के लिए विधिपूर्वक अर्पण करना आवश्यक होता है।
पितरों की तस्वीरें साफ करें और उनपर फूल-माला चढ़ाएं।
घर की दक्षिण दिशा में तिल के तेल का दीपक जलाएं, साथ ही कौवा, चिड़िया, गाय, कुत्ते को रोटी खिलाएं।
अमावस्या की रात पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।
शाम को भूलकर भी न करें इन चीजों का दान