अमर उजाला
Wed, 22 February 2023
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
ॐ श्रीं गं सौभ्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं में वशमानय स्वाहा।
त्रयीमयायाखिलबुद्धिदात्रे बुद्धिप्रदीपाय सुराधिपाय।
नित्याय सत्याय च नित्यबुद्धि नित्यं निरीहाय नमोस्तु नित्यम्।
ॐ ऐं ह्वीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे
ॐ नमो गणपतये कुबेर येकद्रिको फट् स्वाहा।
इदं दुर्वादलं ऊं गं गणपतये नमः
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