अमर उजाला
Tue, 12 November 2024
देवउठनी एकादशी व्रत को बहुत ही महत्वपूर्ण व्रतों में से एक माना जाता है
क्योंकि इस दिन श्रीहरि चार माह के बाद शयनकाल से जागते हैं और चातुर्मास की समाप्ति होती है
इसे देवोत्थान, देव प्रभोदिनी, देवउठनी ग्यारस एकादशी जैसे नामों से भी जाना जाता है
मान्यता है कि देवउठनी एकादशी पर व्रत रखने से सभी अशुभ संस्कार नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है
यदि कुंडली में चंद्र दोष हो तो देवउठनी एकादशी के दिन जल या फलाहार व्रत रखने से चंद्रमा मजबूत होता है और मानसिक स्थिति अच्छी होती है
शास्त्रों में कहा गया है कि देवउठनी एकादशी का व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करने वाले जातक को हजार अश्वमेध और सौ राजसूय यज्ञ कराने के समान फल की प्राप्ति होती है
कार्तिक महीने की देवउठनी एकादशी पर व्रत रखने से सोया भाग्य जाग जाता है और जीवन में धन, सुख, समृद्धि का आगमन होता है
छठ के बाद पूजा में उपयोग हुए सूप का भूलकर भी इस तरह न करें इस्तेमाल