वह विद्वान जिसने असंख्य किताबों का अध्ययन बिना सदगुरु के आशीर्वाद से कर लिया वह विद्वानों की सभा में एक सच्चे विद्वान के रूप में नहीं चमकता है. उसी प्रकार जिस प्रकार एक नाजायज औलाद को दुनिया में कोई प्रतिष्ठा हासिल नहीं होती.
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हमें दूसरों से जो मदद प्राप्त हुई है उसे हमें लौटाना चाहिए. उसी प्रकार यदि किसी ने हमसे दुष्टता की है तो हमें भी उससे दुष्टता करनी चाहिए. ऐसा करने में कोई पाप नहीं है.
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वह चीज जो दूर दिखाई देती है, जो असंभव दिखाई देती है, जो हमारी पहुंच से बाहर दिखाई देती है, वह भी आसानी से हासिल हो सकती है यदि हम तप करते है. क्योंकि तप से ऊपर कुछ नहीं.
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लोभ से बड़ा दुर्गुण क्या हो सकता है. पर निंदा से बड़ा पाप क्या है. जो सत्य में प्रस्थापित है उसे तप करने की क्या जरूरत है. जिसका ह्रदय शुद्ध है उसे तीर्थ यात्रा की क्या जरूरत है.
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समुद्र ही सभी रत्नों का भण्डार है. वह शंख का पिता है. देवी लक्ष्मी शंख की बहन है. लेकिन दर-दर पर भीख मांगने वाले हाथ में शंख ले कर घूमते हैं. इससे यह बात सिद्ध होती है कि उसी को मिलेगा जिसने पहले दिया है.
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