जो जन्म से अंध हैं वो देख नहीं सकते. उसी तरह जो वासना के अधीन हैं वो भी देख नहीं सकते. अहंकारी व्यक्ति को कभी ऐसा नहीं लगता कि वह कुछ बुरा कर रहा है और जो पैसे के पीछे पड़े हैं उनको उनके कर्मों में कोई पाप दिखाई नहीं देता.
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जीवात्मा अपने कर्म के मार्ग से जाता है और जो भी भले बुरे परिणाम कर्मों के आते हैं उन्हें भोगता है. अपने ही कर्मों से वह संसार में बंधता है और अपने ही कर्मों से बन्धनों से छूटता है.
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इन तीन चीजों से हमेशा संतुष्ट रहें
1. खुद की पत्नी 2. वह भोजन जो विधाता ने प्रदान किया. 3. उतना धन जितना ईमानदारी से मिल गया.
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लेकिन इन तीन चीजों से संतुष्ट नहीं होना चाहिए
1. अभ्यास 2. भगवान के नाम का स्मरण. 3. परोपकार
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नीच वर्ग के लोग दौलत चाहते हैं, मध्यम वर्ग के दौलत और इज्जत, लेकिन उच्च वर्ग के लोग सम्मान चाहते हैं क्योंकि सम्मान ही उच्च लोगों की असली दौलत है.
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दीपक अंधेरे का भक्षण करता है इसीलिए काला धुआं बनाता है. इसी प्रकार हम जिस प्रकार का अन्न खाते हैं. माने सात्विक, राजसिक, तामसिक उसी प्रकार के विचार उत्पन्न करते हैं.
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हनुमान जन्मोत्सव के दिन इस विधि से करें बजरंगबली की पूजा