अतिथि को क्यों दिया जाता है भगवान का दर्जा 

अमर उजाला

Tue, 29 March 2022

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पुत्र वही है जो पिता का कहना मानता हो, पिता वही है जो पुत्रों का पालन-पोषण करे, मित्र वही है जिस पर आप विश्वास कर सकते हों और पत्नी वही है जिससे सुख प्राप्त हो

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मनुष्य के कुल की ख्याति उसके आचरण से होती है, मनुष्य की बोलचाल से उसके देश की ख्याति बढ़ती है, मान-सम्मान उसके प्रेम को बढ़ाता है और उसके शरीर का गठन उसके भोजन से बढ़ता है.

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पुत्र , मित्र, सगे सम्बन्धी साधुओं को देखकर दूर भागते हैं, लेकिन जो लोग साधुओं का अनुसरण करते हैं उनमें भक्ति जागृत होती है और उनके उस पुण्य से उनका सारा कुल धन्य हो जाता है.

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ब्राह्मणों को अग्नि की पूजा करनी चाहिए. दूसरे लोगों को ब्राह्मण की पूजा करनी चाहिए. पत्नी को पति की पूजा करनी चाहिए और दोपहर के भोजन के लिए जो अतिथि आए उसकी सभी को पूजा करनी चाहिए.

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मनुष्य के कुल की ख्याति उसके आचरण से होती है, मनुष्य की बोलचाल से उसके देश की ख्याति बढ़ती है, मान-सम्मान उसके प्रेम को बढ़ाता है और उसके शरीर का गठन उसके भोजन से बढ़ता है...

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ऐसे लोग कभी दूसरों का दुःख नहीं समझ सकते 

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