जो अतिथि का सत्कार नहीं करते वो होते हैं चांडाल

अमर उजाला

Wed, 13 July 2022

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वह आदमी चांडाल है, जो एक दूर से अचानक आए हुए थके मांदे अतिथि को आदर सत्कार दिए बिना रात्रि का भोजन खुद खाता है.

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एक व्यक्ति को चारों वेद और सभी धर्म शास्त्रों का ज्ञान है. लेकिन उसे यदि अपने आत्मा की अनुभूति नहीं हुई तो वह उसी चमचे के समान है जिसने अनेक पकवानों को हिलाया लेकिन किसी का स्वाद नहीं चखा.

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एक महान आदमी जब कोई गलत काम करता है तो उसे कोई कुछ नहीं कहता. एक नीच आदमी जब कोई अच्छा काम भी करता है तो उसका धिक्कार होता है. 

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देखिए अमृत पीना तो अच्छा है लेकिन राहु की मौत अमृत पीने से ही हुई. विष पीना नुकसानदायी है लेकिन भगवान शंकर ने जब विष प्राशन किया तो विष उनके गले का अलंकार हो गया.

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एक सच्चा भोजन वह है जो ब्राह्मण को देने के बाद शेष है. प्रेम वह सत्य है जो दूसरों को दिया जाता है. खुद से जो प्रेम होता है वह नहीं. वही बुद्धिमत्ता है जो पाप करने से रोकती है. वही दान है जो बिना दिखावे के किया जाता है.

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यदि आदमी को परख नहीं है तो वह अनमोल रत्नों को तो पैर की धूल में पड़ा हुआ रखता है और घास को सिर पर धारण करता है. ऐसा करने से रत्नों का मूल्य कम नहीं होता और घास के तिनको की महत्ता नहीं बढ़ती.

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