सत्य मेरी माता है. अध्यात्मिक ज्ञान मेरा पिता है. धर्माचरण मेरा बंधु है. दया मेरा मित्र है. भीतर की शांति मेरी पत्नी है. क्षमा मेरा पुत्र है. मेरे परिवार में ये छह लोग है.
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हमारे शरीर नश्वर हैं. धन में तो कोई स्थायी भाव नहीं है. मृत्यु हरदम हमारे निकट है. इसीलिए हमें तुरंत पुण्य कर्म करने चाहिए.
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ब्राह्मणों को स्वादिष्ट भोजन में आनंद आता है. गायों को ताज़ी कोमल घास खाने में. पत्नी को पति के सान्निध्य में. क्षत्रियों को युद्ध में आनंद आता है.
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जो दूसरे की पत्नी को अपनी माता मानता है, दूसरे के धन को मिट्टी का ढेला, दूसरे के सुख दुःख को अपना सुख दुःख. उसी को सही दृष्टि प्राप्त है और वही विद्वान है.
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भगवान राम में ये सब गुण हैं-सद्गुणों में प्रीति, मीठे वचन, दान देने की तीव्र इच्छा शक्ति, मित्रों के साथ कपट रहित व्यवहार, गुरु की उपस्थिति में विनम्रता, मन की गहरी शान्ति, शुद्ध आचरण, गुणों की परख, शास्त्र के ज्ञान की अनुभूति, रूप की सुन्दरता और भगवत भक्ति.