व्यक्ति क्यों होना चाहिए टेढ़ा-मेढ़ा चाणक्य के अनुसार जो लोग सीधे-साधे होते हैं या फिर जिनका स्वभाव सरल होता है उन्हें नुकसान झेलना पड़ सकता है. जिन लोगों का स्वभाव बहुत सरल यानी सीधा-साधा है, उन्हें हमेशा सताया जाता है, क्योंकि जंगल में उन्हीं पेड़ों को सबसे पहले काटा जाता है जो सीधे होते हैं. समय के साथ-साथ व्यक्ति के स्वभाव में काफी बदलाव आते जा रहे हैं.स्वार्थ से भरी इस दुनिया में व्यक्ति भ्रष्ट, चलाक, छल-कपट में उतर आया है. अपने काम सिद्ध करने के लिए किसी भी हद तक चला जाता है. लेकिन इन सबके बीच सीधा व्यक्ति परेशान रहता है. चाणक्य कहते हैं कि किसी चीज की अति अच्छा नहीं होती. बहुत ज्यादा सीधा, सरल और सहज स्वभाव हो तो आपको इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है. इंसान को टेढ़े-मेढ़े पेड़ की तरह बनना चाहिए.यानी कि समय के साथ स्वभाव में बदलाव करें.इसका मतलब ये नहीं कि लोभी बन जाएं. व्यक्ति को स्वभाव से तेज और चतुर होना आवश्यक होता है और स्वभाव ऐसा होना चाहिए कि आप अपनी सुरक्षा भी कर सकें. व्यक्ति क्यों होना चाहिए टेढ़ा-मेढ़ा