तप से हम पा सकते हैं सबकुछ

अमर उजाला

Thu, 9 June 2022

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शायद किसी ने ब्रह्माजी, जो इस सृष्टि के निर्माता है, उनको यह सलाह नहीं दी कि वह सुवर्ण को सुगंध प्रदान करें, गन्ने को फल प्रदान करें, चन्दन के वृक्ष को फूल प्रदान करें, विद्वान को धन प्रदान करें, राजा को लंबी आयु प्रदान करें.

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जो व्यक्ति गुणों से रहित है लेकिन जिसकी लोग सराहना करते हैं वह दुनिया में काबिल माना जा सकता है. लेकिन जो आदमी खुद की ही डींगे हांकता है वो अपने आप को दूसरे की नजरों में गिराता है भले ही वह स्वर्ग का राजा इंद्र हो.

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बसंत ऋतु क्या करेगी यदि बांस पर पत्ते नहीं आते. सूर्य का क्या दोष यदि उल्लू दिन में देख नहीं सकता. बादलों का क्या दोष यदि बारिश की बूंदें चातक पक्षी की चोंच में नहीं गिरतीं. उसे कोई कैसे बदल सकता है जो किसी के मूल में है.

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ब्राह्मण अच्छे भोजन से तृप्त होते हैं. मोर मेघ गर्जना से. साधु दूसरों की सम्पन्नता देखकर और दुष्ट दूसरों की विपदा देखकर.

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वह चीज जो दूर दिखाई देती है, जो असंभव दिखाई देती है, जो हमारी पहुंच से बाहर दिखाई देती है, वह भी आसानी से हासिल हो सकती है यदि हम तप करते हैं. क्योंकि तप से ऊपर कुछ नहीं.

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देखिये क्या आश्चर्य है? बड़े लोग अनोखी बातें करते हैं. वे पैसे को तो तिनके की तरह मामूली समझते हैं लेकिन जब वे उसे प्राप्त करते हैं तो उसके भार से और विनम्र होकर झुक जाते हैं.

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