मूर्खों के साथ मित्रता नहीं रखनी चाहिए, उन्हें त्याग देना ही उचित है, क्योंकि प्रत्यक्ष रूप से वे दो पैरों वाले पशु के सामान हैं,जो अपने धारदार वचनों से वैसे ही ह्रदय को छलनी करता है जैसे अदृश्य कांटा शरीर में घुसकर छलनी करता है.
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पुत्र , मित्र, सगे संबंधी साधुओं को देखकर दूर भागते हैं, लेकिन जो लोग साधुओं का अनुसरण करते हैं उनमें भक्ति जागृत होती है और उनके उस पुण्य से उनका सारा कुल धन्य हो जाता है.
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ब्राह्मणों को अग्नि की पूजा करनी चाहिए . दूसरे लोगों को ब्राह्मण की पूजा करनी चाहिए . पत्नी को पति की पूजा करनी चाहिए तथा दोपहर के भोजन के लिए जो अतिथि आए उसकी सभी को पूजा करनी चाहिए .
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पक्षियों में कौवा नीच है. पशुओ में कुत्ता नीच है. जो तपस्वी पाप करता है वो घिनौना है. लेकिन जो दूसरों की निंदा करता है वह सबसे बड़ा चांडाल है.
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जल अपच की दवा है. जल चैतन्य निर्माण करता है, यदि उसे भोजन पच जाने के बाद पीते है. पानी को भोजन के बाद तुरंत पीना विष पीने के समान है.
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जो व्यक्ति आर्थिक व्यवहार करने में, ज्ञान अर्जन करने में, खाने में और काम-धंधा करने में शर्माता नहीं है वो सुखी हो जाता है.
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सुख-समृद्धि के लिए घर में जरूर लगाएं ये फूलों वाले पौधे