निकट संबंधियों का अपमान करने से क्या होता है?

अमर उजाला

Sat, 4 June 2022

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वह व्यक्ति जो सर्वगुण संपन्न है अपने आप को सिद्ध नहीं कर सकता है जबतक उसे समुचित संरक्षण नहीं मिल जाता. उसी प्रकार जैसे एक मणि तब तक नहीं निखरता जब तक उसे आभूषण में सजाया ना जाए.

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प्रेम और मित्रता बराबर वालों में अच्छी लगती है, राजा के यहां नौकरी करने वाले को ही सम्मान मिलता है, व्यवसायों में वाणिज्य सबसे अच्छा है एवं उत्तम गुणों वाली स्त्री अपने घर में सुरक्षित रहती है।

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अनेक व्यक्ति जो एक ही गर्भ से पैदा हुए हैं या एक ही नक्षत्र में पैदा हुए हैं वे एक समान नहीं रहते. उसी प्रकार जैसे बेर के झाड़ के सभी बेर एक से नहीं रहते.

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मूढ़ लोग बुद्धिमानों से ईर्ष्या करते हैं. गलत मार्ग पर चलने वाली औरत पवित्र स्त्री से ईर्ष्या करती है. बदसूरत औरत खूबसूरत औरत से ईर्ष्या करती है.

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अपने निकट संबंधियों का अपमान करने से जान जाती है, दूसरों का अपमान करने से दौलत जाती है, राजा का अपमान करने से सब कुछ जाता है.

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मेरी नजरों में वह आदमी मृत है जो जीते जी धर्म का पालन नहीं करता. लेकिन जो धर्म पालन में अपने प्राण दे देता है वह मरने के बाद भी बेशक लम्बा जीता है.

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जब आदमी में शक्ति नहीं रह जाती वह साधू हो जाता है. जिसके पास दौलत नहीं होती वह ब्रह्मचारी बन जाता है. रुग्ण भगवान का भक्त हो जाता है. जब औरत बूढ़ी होती है तो पति के प्रति समर्पित हो जाती है.

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जो व्यक्ति नसीब के सहारे चलता है वो बर्बाद होता जाता है

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