जो व्यक्ति नसीब के सहारे चलता है वो बर्बाद होता जाता है
अमर उजाला
Fri, 3 June 2022
Image Credit : istock
वो घर जहां ब्राह्मणों के चरण कमल को धोया नहीं जाता, जहां वैदिक मंत्रों का जोर से उच्चारण नहीं होता. और जहां भगवान को और पितरों को भोग नहीं लगाया जाता, वह घर एक श्मशान है.
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जो भविष्य के लिए तैयार है और जो किसी भी परिस्थिति को चतुराई से निपटता है. ये दोनों व्यक्ति सुखी हैं. लेकिन जो आदमी सिर्फ नसीब के सहारे चलता है वह बर्बाद होता है.
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जिसे अपनी कोई अकल नहीं उसकी शास्त्र क्या भलाई करेंगे. एक अंधा आदमी आईने का क्या करेगा.
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दीपक अंधेरे का भक्षण करता है इसीलिए काला धुआं बनाता है. इसी प्रकार हम जिस प्रकार का अन्न खाते हैं. माने सात्विक, राजसिक, तामसिक उसी प्रकार के विचार उत्पन्न करते हैं.
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जो व्यक्ति एक साल तक भोजन करते समय भगवान का ध्यान करेगा और मुंह से कुछ नहीं बोलेगा उसे एक हजार करोड़ वर्ष तक स्वर्ग लोक की प्राप्ति होगी.