राजा लोग अपने आस-पास अच्छे कुल के लोगों को इसलिए रखते हैं क्योंकि ऐसे लोग ना आरम्भ में, ना बीच में और ना ही अंत में साथ छोड़कर जाते हैं.
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जब प्रलय का समय आता है तो समुद्र भी अपनी मर्यादा छोड़कर किनारों को छोड़ अथवा तोड़ जाते हैं, लेकिन सज्जन पुरुष प्रलय के समान भयंकर आपत्ति एवं विपत्ति में भी अपनी मर्यादा नहीं बदलते.
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व्यक्ति इन 3 चीजों से संतुष्ट रहे- खुद की पत्नी, वह भोजन जो विधाता ने प्रदान किया, उतना धन जितना ईमानदारी से मिल गया.
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हम अपना हर कदम फूंक फूंक कर रखें. हम छाना हुआ जल पिएं. हम वही बात बोलें जो शास्त्र सम्मत है. हम वही काम करें जिसके बारे में हम सावधानीपूर्वक सोच चुके हैं.
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वह ब्राह्मण जो दूसरो के काम में अड़ंगे डालता है, जो दम्भी है, स्वार्थी है, धोखेबाज है, दूसरो से घृणा करता है और बोलते समय मुंह में मिठास और ह्रदय में क्रूरता रखता है, वह एक बिल्ली के समान है.
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जब आप तप करते हैं तो अकेले करें, अभ्यास करते हैं तो दूसरे के साथ करें, गायन करते हैं तो तीन लोग करें, कृषि चार लोग करें, युद्ध अनेक लोग मिलकर करें.