एक दुर्जन और एक सांप में अंतर

अमर उजाला

Mon, 9 May 2022

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वह विद्वान जिसने असंख्य किताबों का अध्ययन बिना सदगुरु के आशीर्वाद से कर लिया वह विद्वानों की सभा में एक सच्चे विद्वान के रूप में नहीं चमकता है. उसी प्रकार जिस प्रकार एक नाजायज औलाद को दुनिया में कोई प्रतिष्ठा हासिल नहीं होती. 

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व्यक्ति को महत्ता उसके गुण प्रदान करते हैं वह जिन पदों पर काम करता है सिर्फ उससे कुछ नहीं होता. क्या आप एक कौवे को गरुड़ कहेंगे यदि वह एक ऊँची ईमारत के छत पर जाकर बैठता है.

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कुसंग का त्याग करें और संतजनों से मेलजोल बढ़ाएं. दिन और रात गुणों का संपादन करें. उसपर हमेशा चिंतन करें जो शाश्वत है और जो अनित्य है उसे भूल जाएं.

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जो भविष्य के लिए तैयार है और जो किसी भी परिस्थिति को चतुराई से निपटता है. ये दोनों व्यक्ति सुखी हैं. लेकिन जो आदमी सिर्फ नसीब के सहारे चलता है वह बर्बाद होता है.

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यदि राजा पुण्यात्मा है तो प्रजा भी वैसी ही होती है. यदि राजा पापी है तो प्रजा भी पापी. यदि वह सामान्य है तो प्रजा सामान्य. प्रजा के सामने राजा का उदाहरण होता है. और वो उसका अनुसरण करती है.

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कांटों से और दुष्ट लोगों से बचने के दो उपाय हैं. पैर में जूते पहनो और दुष्टों को इतना शर्मसार करो कि वो अपना सिर उठा ना सकें और आपसे दूर रहें.

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एक दुर्जन और एक सांप में अंतर

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