एक दुर्जन और एक सांप में अंतर जो एक संकट का सामना करने वाले ब्राह्मण को भक्ति भाव से अल्पदान देता है उसे बदले में विपुल लाभ होता है. हम उसके लिए ना पछताएं जो बीत गया. हम भविष्य की चिंता भी ना करें. विवेक बुद्धि रखने वाले लोग केवल वर्तमान में जीते हैं. आप दौलत, मित्र, पत्नी और राज्य गंवाकर वापस पा सकते हैं लेकिन यदि आप अपनी काया गंवा देते हैं तो वापस नहीं मिलेगी. उदारता, वचनों में मधुरता, साहस, आचरण में विवेक ये बातें कोई पा नहीं सकता ये मूल में होनी चाहिए. जो अपने समाज को छोड़कर दूसरे समाज को जा मिलता है, वह उसी राजा की तरह नष्ट हो जाता है जो अधर्म के मार्ग पर चलता है. एक दुर्जन और एक सांप में यह अंतर है कि सांप तभी डसेगा जब उसकी जान को खतरा हो लेकिन दुर्जन पग-पग पर हानि पहुंचाने की कोशिश करेगा . एक ब्राह्मण जो तालाब को, कुएं को, टाके को, बगीचे को और मंदिर को नष्ट करता है, वह मलिच्छ है. एक दुर्जन और एक सांप में अंतर