आचार्य चाणक्य कहते हैं कि लक्ष्मी मेरी माता हैं. विष्णु मेरे पिता हैं. वैष्णव जन मेरे सगे सम्बन्धी हैं और तीनों लोक मेरा देश है.
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रात्रि के समय कितने ही प्रकार के पंछी वृक्ष पर विश्राम करते हैं. भोर होते ही सब पंछी दसों दिशाओं में उड़ जाते हैं. हम क्यों भला दुःख करें यदि हमारे अपने हमें छोड़कर चले गए.
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आप चाहे सौ बार पवित्र जल में स्नान करें, आप अपने मन का मैल नहीं धो सकते. उसी प्रकार जिस प्रकार मदिरा का पात्र पवित्र नहीं हो सकता चाहे आप उसे गर्म करके सारी मदिरा की भाप बना दें.
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स्वर्ग में निवास करने वाले देवताओं में और धरती पर निवास करने वाले लोगों में कुछ साम्य पाए जाते हैं. उनके समान गुण हैं -परोपकार , मीठे वचन, भगवान् की आराधना, ब्राह्मणों की जरूरतों की पूर्ति.
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क्या करना ऊंचे कुल का यदि बुद्धिमत्ता ना हो. एक नीच कुल में उत्पन्न होने वाले विद्वान् व्यक्ति का सम्मान देवता भी करते हैं.
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विद्वान व्यक्ति लोगों से सम्मान पाता है. विद्वान उसकी विद्वत्ता के लिए हर जगह सम्मान पाता है. यह बिलकुल सच है कि विद्या हर जगह सम्मानित है.
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सुबह उठकर दिन भर जो भी काम करने वाले हैं उसके बारे में सोचें. दोपहर को अपनी मां को याद करें. रात को चोरों को ना भूलें
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रुद्राक्ष धारण करने वाले भूलकर भी न करें ये गलतियां