ऐसे बढ़ता है धन

अमर उजाला

Tue, 26 April 2022

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संचित धन खर्च करने से बढ़ता है. उसी प्रकार जैसे ताजा जल जो अभी आया है बचता है, यदि पुराने स्थिर जल जाए को निकल बहार किया

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वह व्यक्ति जिसके पास धन है उसके पास मित्र और संबंधी भी बहुत रहते हैं. वही इस दुनिया में टिक पाता है और उसी को इज्जत मिलती है.

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जो जल धरती में समा गया वो शुद्ध है. परिवार को समर्पित पत्नी शुद्ध है. लोगों का कल्याण करने वाला राजा शुद्ध है. वह ब्राह्मण शुद्ध है जो संतुष्ट है.

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यदि नाग अपना फन उठाए, भले ही वह जहरीला ना हो तो भी उसका यह करना सामने वाले के मन में डर पैदा करने को पर्याप्त है. यहां यह बात कोई मायने नहीं रखती कि वह जहरीला है कि नहीं.

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यह बेहतर है कि आप जंगल में एक झाड़ के नीचे रहें, जहां बाघ और हाथी रहते हैं, उस जगह रहकर आप फल खाएं और जलपान करें, आप घास पर सोएं और पुराने पेड़ों की खालें पहनें. लेकिन आप अपने सगे संबंधियों में ना रहें यदि आप निर्धन हो गए हैं.

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एक कड़कती हुई बिजली एक पहाड़ को तोड़ देती है, क्या बिजली पहाड़ जितनी विशाल है. जी नहीं. बिलकुल नहीं. वही बड़ा है जिसकी शक्ति छा जाती है. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आकार कितना है.

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एक बुरा आदमी सुधर नहीं सकता

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