संतोष के समान कोई सुख नहीं हंस वहां रहते हैं जहां पानी होता है. पानी सूखने पर वे उस जगह को छोड़ देते हैं. आप किसी आदमी को ऐसा व्यवहार ना करने दें कि वह आपके पास आता जाता रहे. एक संयमित मन के समान कोई तप नहीं. संतोष के समान कोई सुख नहीं. लोभ के समान कोई रोग नहीं. दया के समान कोई गुण नहीं. क्रोध साक्षात् यम है. तृष्णा नरक की ओर ले जाने वाली वैतरणी है. ज्ञान कामधेनु है. संतोष ही तो नंदनवन है. जिनके भेजे खाली हैं, वो कोई उपदेश नहीं समझते. यदि बांस को मलय पर्वत पर उगाया जाए तो भी उसमें चंदन के गुण नहीं आते. जिसे अपनी कोई अकल नहीं उसकी शास्त्र क्या भलाई करेंगे. एक अंधा आदमी आईने का क्या करेगा. राजा लोग अपने आस पास अच्छे कुल के लोगों को इसलिए रखते हैं क्योंकि ऐसे लोग ना आरम्भ में, ना बीच में और ना ही अंत मे साथ छोड़कर जाते हैं. राजा