जो मित्र आपके सामने चिकनी-चुपड़ी बातें करता हो और पीठ पीछे आपके कार्य को बिगाड़ देता हो, उसे त्याग देने में ही भलाई है. वह उस बरतन के समान है, जिसके ऊपर के हिस्से में दूध लगा है, परन्तु अंदर विष भरा हुआ है.
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वही गृहस्थ सुखी है, जिसकी संतान उनकी आज्ञा का पालन करती है, पिता का भी कर्तव्य है कि वह पुत्रों का पालन-पोषण अच्छी तरह से करे.
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ऐसी व्यक्ति को मित्र नहीं कहा जा सकता है, जिस पर विश्वास नहीं किया जा सके और ऐसी पत्नी व्यर्थ है, जिससे किसी प्रकार का सुख प्राप्त न हो.
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पृथ्वी सत्य की शक्ति द्वारा समर्पित है. यह सत्य की शक्ति ही है, जो सूरज को चमक और हवा को वेग देती है. दरअसल सभी चीजें सत्य पर निर्भर करती हैं
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हे बुद्धिमान लोगों ! अपना धन उन्हीं को दो, जो उसके योग्य हों और किसी को नहीं. बादलों के द्वारा लिया गया समुन्द्र का जल हमेशा मीठा होता है.
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यदि किसी का स्वभाव अच्छा है तो उसे किसी गुण की क्या जरूरत है ! यदि आदमी के पास प्रसिद्धि है तो भला उसे और किसी सिंगार की क्या आवश्यकता है !